आत्मजागरण और शिवत्व की साधना का पर्व है महाशिवरात्रि- प्रो0 डॉ0 नवीन सिंह।
• सुरेश कुमार सिंह गौतम
बस्ती(उ0प्र0)–14 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर संकल्प योग वैलनेस सेंटर के निदेशक प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मजागरण और आंतरिक परिवर्तन की दिव्य रात्रि है। यह वह अवसर है जब व्यक्ति बाहरी कोलाहल से हटकर अपने भीतर के शिवत्व को जागृत करने का प्रयास करता है।
उन्होंने कहा कि “शिव” का अर्थ ही कल्याण, शांति और परम चेतना है। महाशिवरात्रि हमें जीवन में संतुलन, संयम और समर्पण को अपनाने की प्रेरणा देती है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ तथा इसी रात्रि में शिवलिंग का प्राकट्य हुआ। यह पर्व अज्ञान से ज्ञान, तमस से प्रकाश और अशांति से समाधि की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
प्रो. सिंह ने बताया कि योग दर्शन में शिव को आदियोगी माना गया है। महाशिवरात्रि की रात्रि में जागरण का विशेष महत्व है, क्योंकि यह साधक को आलस्य और अज्ञान से ऊपर उठकर चेतना के उच्च स्तर पर स्थापित होने का संदेश देता है। उपवास, जप और तप का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इंद्रिय संयम और मन की शुद्धि है।
उन्होंने कहा कि शिव का तांडव सृष्टि के परिवर्तन और नवसृजन का प्रतीक है, जबकि नीलकंठ स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन के विषम परिस्थितियों को भी धैर्य और संतुलन के साथ धारण करना ही सच्ची साधना है।
अंत में उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि इस महाशिवरात्रि पर वे मन को स्थिर, प्राणों को संतुलित और विचारों को पवित्र बनाने का संकल्प लें, ताकि समाज में शांति, समता और सद्भाव का विस्तार हो सके।