डॉ0 वी0 के0 वर्मा रचित होली मुक्तक एंव होली गीत। March 03, 2026 • सुरेश कुमार सिंह गौतम बस्ती (उ0प्र0)-3मार्च 2026,*होली पर हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं* मुक्तक –––––––––कटुता का साम्राज्य मिटाओ,मन का सारा मैल छुड़ाओ।। जाति पाति का भेद मिटाकर,होली का त्योहार मनाओ। 🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹 कलियों का श्रृंगार करो, रंगों की बौछार करो।गोरी रूठ गई है “वर्मा”तुम उसका मनुहार करो।❌❌❌❌❌❌❌धूमधाम से खेलो होली,रंग दो तुम मन की रंगोली।होली के दिन तुम गोरी की,रंग दो अगिया रंग दो चोली।🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶आया सुखद हवा का झोंका,गोरी आज ना देना धोखा।खूब झूम कर फगुआ गाओ,होली का है पर्व अनोखा।🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺तेरी है हिरनी सी चाल,तेरी गजब गुलाबी गाल।आज है होली आओ गोरी,कर दूं तेरा चेहरा लाल।🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻आज प्रेम का भाव जगाओ,अपने मन का दंभ मिटाओ।जो भी आए उसे प्रेम से,रंग अबीर-गुलाल लगाओ।🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴बहुत किया मैंने मनमानी,उतर गया आंखों का पानी।होली के दिन चिंतित रहता,जब से हार गया परधानी।🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹पत्नी बोली जगा दिया,अमन चैन सब भगा दिया।होली के दिन एक लाख का,पति को चूना लगा दिया।⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫ होली गीत_ *होली पर दे रहा बधाई*आया होली का त्यौहार।जड़ चेतन में खुशी अपार। दसों दिशाएं लगी महकने।घर आँगन भी लगे चहकने।कैसी मधु ऋतु आई है।प्रकृति नटी हरषाई है। हुरियारों की टोली है। कैसी अद्भुत होली है।होली में हो रहा धमाल। हर चेहेरा लगता है लाल।रंगो की चहुँदिशि बरसात।सिहर-सिहर जाता है गात।चारों तरफ फाग के गीत। उमड़ उठी जन-जन में प्रीत।कही हंसी है कही ठिठोली। भीग गई है अंगिया चोली।लगे महकने घर खलिहान। घर घर में बनते पकवान। सारे शिकवे भूल कर।होली खेलें झूम कर। आओ मिलकर खेले रंग।हर चेहरा कर दें बदरंग।लेकिन मर्यादा में रहिए।भावुकता में अधिक न बहिए।फूलों जैसा आज खिलें। इक दूजे से गले मिलें। कैसी सुखद घड़ी यह आई।होली पर दे रहा बधाई ।बुराई पर भलाई की जीत, यही है होली का संगीत।_ – *डा. वी. के. वर्मा,* समाजसेवी / आयुष चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सलाय-बस्ती।