शक्ति, साहस और धर्म की प्रतीक हैं मां कात्यायनी -डॉ नवीन सिंह

मां कात्यायनी का इतिहास और महत्व: शक्ति, साहस और धर्म की प्रतीक -डॉ नवीन सिंह,निदेशक संकल्प योग वेलनेस सेन्टर, बस्ती

बस्ती(उ0प्र0)- 24 मार्च 2026, हिंदू धर्म में मां कात्यायनी का विशेष स्थान है। वे मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में छठा स्वरूप मानी जाती हैं और उनकी पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। मां कात्यायनी को शक्ति, साहस और दुष्ट शक्तियों के विनाश की देवी के रूप में पूजा जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महान ऋषि कात्यायन ने कठोर तपस्या कर देवी से प्रार्थना की थी कि वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर जन्म लिया, जिसके कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा।

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि जब अत्याचारी राक्षस महिषासुर का आतंक बढ़ गया, तब देवी कात्यायनी ने उसका वध कर देवताओं और मानव जाति को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। इस कारण उन्हें दुष्टों के संहार की प्रतीक माना जाता है।

मां कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से की जाती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजन और साधना के माध्यम से देवी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर देवी अपने भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं तथा जीवन की बाधाओं को दूर करती हैं।

धार्मिक दृष्टि से मां कात्यायनी की आराधना से न केवल नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी प्राप्त होती है।

डॉ. नवीन योगी, निदेशक, संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती, ने बताया कि मां कात्यायनी की उपासना से व्यक्ति के भीतर आत्मबल का विकास होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ मां की आराधना करें।