प्राणिक ऊर्जा चैनलों के संतुलन से स्वस्थ जीवन संभव: प्रो. डॉ. नवीन सिंह।
• सुरेश कुमार सिंह गौतम
बस्ती(उ0प्र0)- 9 अप्रैल 2026,प्राणिक ऊर्जा चैनलों, जिन्हें योग विज्ञान में "नाड़ी" कहा जाता है, के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इंडियन योग एसोसिएशन उत्तर प्रदेश चैप्टर पूर्वी जोन के अध्यक्ष प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि मानव शरीर में ऊर्जा का प्रवाह इन्हीं सूक्ष्म मार्गों के माध्यम से संचालित होता है। उन्होंने कहा कि नाड़ियों का संतुलन बनाए रखना शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने जानकारी दी कि शरीर में मुख्य रूप से तीन प्रमुख नाड़ियाँ होती हैं—ईड़ा, पिंगला और सुषुम्ना। ईड़ा नाड़ी शरीर के बाईं ओर स्थित होती है और इसे शीतलता तथा चंद्र ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह मन और भावनाओं को संतुलित करने में सहायक होती है। वहीं पिंगला नाड़ी शरीर के दाईं ओर स्थित होती है, जो सूर्य ऊर्जा और सक्रियता का प्रतिनिधित्व करती है तथा शारीरिक ऊर्जा और कार्यक्षमता को नियंत्रित करती है।
प्रो. सिंह के अनुसार, सुषुम्ना नाड़ी शरीर के मध्य में स्थित सबसे महत्वपूर्ण नाड़ी है, जो आध्यात्मिक उन्नति और आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त करती है। जब ईड़ा और पिंगला संतुलित होते हैं, तब सुषुम्ना सक्रिय होती है, जिससे व्यक्ति उच्च चेतना की अवस्था तक पहुंच सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से इन नाड़ियों को संतुलित किया जा सकता है। विशेष रूप से अनुलोम-विलोम, नाड़ी शोधन और ध्यान जैसे अभ्यास प्राणिक ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने में प्रभावी सिद्ध होते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में योग को शामिल करे, तो वह न केवल रोगों से बच सकता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन भी प्राप्त कर सकता है।