सोऽहम् साधना द्वारा प्राणतत्व का परिपोषण – डॉ नवीन योगी

बस्ती(उ0प्र0)–15फरवरी 2026, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में अपने अद्वितीय योगदान के लिए विख्यात प्रोफेसर डॉ नवीन सिंह (राष्ट्रीय महासचिव, विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत) ने सोऽहम् साधना के महत्व और लाभों पर विस्तार से चर्चा की।

डॉ योगी के अनुसार, सोऽहम् साधना एक अद्भुत प्राणयोग साधना है, जिसे अजपा गायत्री जाप के नाम से भी जाना जाता है। इसमें श्वास लेते समय “सो” और छोड़ते समय “हम” ध्वनि का अनुभव गहन भावनात्मक एवं आध्यात्मिक रूप से किया जाता है। यह साधना न केवल शारीरिक प्राणशक्ति का विकास करती है, बल्कि मन और चेतना को भी उच्चतम स्तर पर पोषित करती है।

विशेषज्ञ ने बताया कि इस साधना के माध्यम से शरीर और मन से लोभ, मोह, वासना और तृष्णा जैसी अवांछनीय प्रवृत्तियों का नाश होता है और उत्कृष्ट चिन्तन एवं ब्रह्म-सत्ता की अनुभूति प्राप्त होती है।

डॉ योगी ने प्राणतत्व और षट्चक्र वेधन के संबंध में बताया कि सोऽहम् साधना के अभ्यास से नासिका द्वारा प्राणतत्व का संचरण सीधे आज्ञाचक्र तक पहुंचता है और भावपरक तथा शक्तिपरक प्रभाव शरीर और मस्तिष्क में संतुलित शक्ति का संचार करता है। यही कारण है कि सोऽहम् साधना को सभी प्राणायामों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।

साधना का एक और अद्भुत लाभ दिव्य गन्धानुभूति है। नियमित अभ्यास से साधक को उपासना स्थल में तथा साधना के बाहर भी गंधों के माध्यम से दिव्य शक्तियों की अनुभूति होती है। यह अनुभव केवल मनोविनोद या कुतूहल के लिए नहीं, बल्कि दिव्य शक्तियों के विकास और आध्यात्मिक साधना हेतु महत्वपूर्ण है।

इसके अतिरिक्त, सोऽहम् साधना स्वर साधना के क्षेत्र में भी मार्गदर्शक है। शरीर और मन की ऊर्जा, इड़ा-पिंगला नाड़ियों के माध्यम से चन्द्र-सूर्य स्वर के अनुसार संचालित होती रहती है। इसका गहन अभ्यास साधक को अपनी अन्तः-क्षमता और समय अनुसार कार्यों की उपयुक्तता का भी ज्ञान देता है।

डॉ नवीन योगी ने कहा कि सोऽहम् साधना के माध्यम से पंचकोशों के अनावरण और प्रखर प्राणशक्ति का सहज विकास संभव है। यही कारण है कि योग और प्राणायाम के विशेषज्ञ इसे प्राणयोग का सर्वोच्च साधन मानते हैं।