मौसम के पूर्वानुमान को सुने तथा मौसम के बदलाव पर सावधानी बरतें।

बस्ती(उ0प्र0)– 06 मई 2026 सू.वि., वर्तमान समय में पारा 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच होने के कारण भीषण गर्मी, गर्म हवा व लू के प्रकोप से बचाव हेतु संबंधित विभागों को जिलाधिकारी द्वारा निर्देश है। उक्त जानकारी देते हुए अपर जिलाधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान ने बताया कि गर्म हवाओं से बचने के लिए खिडकी को रिफ्लेक्टर जैसे एल्यूमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके। उन खिड़कियों व दरवाजों पर जिनसे दोपहर के समय गर्म हवाएं आती है, काले परदे लगाकर रखना चाहिए। 

       उन्होने बताया कि स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुने और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तन के प्रति सजग रहें। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण ले। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला न छोड़े। जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें और बासी खाने का प्रयोग कदापि न करें और मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढक्कर रखें। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छाछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नींबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें।

       उन्होने बताया कि गर्मी में शरीर के द्रव्य थोड़ी ब्लीड सूखने लगते है। शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारी, मोटापा, पार्किंसन रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव करने की जरूरत है। इसके अलावा डाययूरेटिक, एंटीस्टिमिनक, मानसिक रोग की औषधि का उपयोग करने वाले व्यक्ति भी लू से सावधान रहें।

      उन्होने बताया कि गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उल्टे श्वास गति में तेजी, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र न होना अथवा इसमें कमी आदि लू के मुख्य लक्षण है। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।

      उन्होने बताया कि जनपद में हीटवेव (लू) 05 वर्ष से कम आयु के बच्चे व 65 वर्ष से ज्यादा के व्यक्ति, गर्भवती महिलायें, ऐसे व्यक्ति जो कि सैन्य, कृषि, निर्माण और औद्योगिक व्यवसाय में श्रमिक, मजदूर, खिलाड़ी आदि, शारीरिक तौर पर कमजोर व्यक्ति एवं मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति, त्वचा संबंधित जैसे-सोरायसिस, पायोडर्मा आदि से प्रभावित व्यक्ति, पर्यावरण बदलने के कारण गर्मी के अनुकूलनता का आभाव तथा सोने का अभाव के प्रति जोखिम होता है। 

      उन्होने बताया कि आपदा संबंधी सहायता के लिए एम्बुलेंस 108, पुलिस 112, राहत आयुक्त कार्यालय 1070 टोल फ्री, जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेन्टर बस्ती कंट्रोल रूम 1077 नम्बरों पर सम्पर्क कर सकते है।

गर्म हवाएं/लू की स्थिति में क्या करें और क्या न करें-

उन्होने बताया कि रेडियो सुनिए, टीवी देखिए, स्थानीय मौसम समाचार के लिए समाचार पत्र पढ़ें, पर्याप्त पानी पिये भले ही प्यास न लगे, खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए ओआरएस, लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू का पानी, छाछ आदि जैसे घरेलू पेय का इस्तेमाल करें, हल्के वजन, हल्के रंग के, ढीले, सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढके, कपड़े, टोपी या छतरी का उपयोग करें, हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं तथा अनावश्यक घर से बाहर प्रात-11.00 से सायंकाल-4.00 बजे तक न निकले।

      उन्होने नियोक्ता और श्रमिको को बताया है कि कार्य स्थल के पास ठंडा पेयजल उपलब्ध कराएं, कार्यकर्ताओं को सीधे धूप से बचने को कहें, अति परिश्रम वाले कार्यों को दिन के ठन्डे समय में निर्धारित करें, बाहरी गतिविधियों के लिए ब्रेक की आवृत्ति में वृद्धि करें तथा गर्भवती श्रमिकों का अतिरिक्त ध्यान दिया जाना चाहिए तथा वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों के लिए तेज गर्मी में कम से कम दिन में दो बार जांच करें, उनके पास फोन हो, गर्मी से बेचौनी पर ठंडक दें, शरीर गीला रखें एवं हमेशा पानी की बोतल रखें।

      उन्होने शिशुओं के लिए बताया कि पर्याप्त पानी पिलाएं, गर्मी की बीमारियों का पता लगाएं, पेशाब का रंग गहरा होने पर डिहाइड्रेशन मानें एवं बच्चों को बंद गाड़ी में न छोड़ें तथा पशुओं के लिए तेज गर्मी में घर के अंदर रखें, छायादार स्थान में रखें, ताजा पानी दें, बर्फ डालें, दो बाउल पानी रखें एवं वाहन में न छोड़ें। उन्होने बताया कि इसके अलावा अन्य सावधानियाँ जैसे-घर के अंदर रहें, घर को ठंडा रखें, पर्दे लगाएं, निचली मंजिल पर रहें, पंखे चलाएं, नम कपड़े पहनें तथा कमजोरी पर डॉक्टर को दिखाएं।