रक्तदान महादान: प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने किया 37वाँ स्वैच्छिक रक्तदान।

स्व. विष्णु दत्त ओझा जी की 15वीं पुण्यतिथि पर आयोजित वैदिक यज्ञ, विचार गोष्ठी एवं रक्तदान शिविर में दिया मानवता की सेवा का संदेश

बस्ती(उ0प्र0)– 25 जुलाई। परम आदरणीय एवं श्रद्धेय स्वर्गीय श्री विष्णु दत्त ओझा जी की 15वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुस्तकालय परिसर (टाउन क्लब, गांधीनगर, बस्ती) में वैदिक यज्ञ, विचार गोष्ठी एवं स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक एवं धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने सहभागिता कर स्व. ओझा जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर इंडियन योग एसोसिएशन उत्तर प्रदेश चैप्टर, पूर्वी जोन के अध्यक्ष प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने अपने जीवन का 37वाँ स्वैच्छिक रक्तदान कर मानवता की सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है और प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।

प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य है। एक यूनिट रक्त कई मरीजों के जीवन को बचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने बताया कि नियमित रक्तदान से रक्तदाता के स्वास्थ्य की जांच भी होती रहती है तथा शरीर में नए रक्त कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने स्वर्गीय श्री विष्णु दत्त ओझा जी के सेवा, समर्पण, निष्ठा एवं मानवता के आदर्शों को स्मरण करते हुए कहा कि समाज को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अधिक से अधिक लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान अभियान से जोड़ना चाहिए। इससे न केवल जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध होगा, बल्कि समाज में सेवा और परोपकार की भावना भी सुदृढ़ होगी।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जन-जागरूकता फैलाने तथा अधिकाधिक लोगों को इस महाअभियान से जोड़ने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि "रक्तदान महादान है, क्योंकि आपका एक छोटा-सा प्रयास किसी व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है।"