बच्चों की मानसिकता सुधार में एक्यूप्रेशर की बढ़ती भूमिका-प्रो0 डॉ नवीन सिंह।
• सुरेश कुमार सिंह गौतम
तनाव, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने में कारगर हो सकती है पारंपरिक चिकित्सा पद्धति
बस्ती(उ0प्र0)-7 मई 2026, आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में बच्चों की मानसिक स्थिति एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। ऐसे समय में एक्यूप्रेशर जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में सहायक सिद्ध हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के विशेष बिंदुओं पर दबाव डालकर न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक संतुलन भी बेहतर किया जा सकता है।
एक्यूप्रेशर के माध्यम से बच्चों में तनाव और चिंता को कम करने में मदद मिलती है, जिससे वे अधिक शांत और संतुलित महसूस करते हैं। इसके साथ ही यह पद्धति एकाग्रता और ध्यान शक्ति बढ़ाने में भी सहायक मानी जाती है, जो पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इतना ही नहीं, नियमित एक्यूप्रेशर अभ्यास बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाकर उन्हें सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों पर एक्यूप्रेशर का प्रयोग करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षित चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है, ताकि बच्चों की उम्र और आवश्यकता के अनुसार सही बिंदुओं और तकनीकों का चयन किया जा सके।
इसके अलावा, बच्चों की मानसिकता को बेहतर बनाने के लिए केवल एक्यूप्रेशर ही पर्याप्त नहीं है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, सकारात्मक वातावरण और अभिभावकों व शिक्षकों का सहयोग भी अत्यंत आवश्यक है। इन सभी उपायों के समन्वय से बच्चों का समग्र विकास संभव है।
इस विषय पर जानकारी देते हुए प्रो. डॉ. नवीन सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत ने बताया कि यदि एक्यूप्रेशर को सही मार्गदर्शन और नियमितता के साथ अपनाया जाए, तो यह बच्चों के मानसिक विकास में एक प्रभावी साधन बन सकता है।