भारत देश का एक मान्य सा नियम हो गया है कि जो शासन,प्रशासन स्तर मेंव्याप्तअन्याय,अनीति,अपराध तथा भ्रष्टाचार के विरोध में आवाज उठायेगा उसे सरकारी तन्त्र पहले मानसिक विक्षिप्त या पागल घोषित करेगा ,फिर भी अगर वह चुप न हुआ तो उसे पुलिस एनकाउंटर के बहाने मौत की नींद सुला दिया जाएगा ।ऐसा देश आजाद होने के पहले चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के साथ अंग्रेज शासक कर चुके हैं ।
बस्ती(उ0प्र0)–17 जुलाई 2026 , आज ही की तारीख 17 जून 2026 को बिहार प्रान्त में देश व समाज भक्त *भरत भूषण तिवारी* नाम के नौजवान की पुलिस एन्काउंटर में हत्या कर दिया गया था ।
विडम्बना यह है कि ऐसे देश व समाज प्रेमियों को लोग, उनके न तो जिन्दा रहते हुए उनका और न ही उनकी मौत के बाद उनके परिवार वालों का साथ देते हैं । यही कारण है कि अब कोई दिल से देश व समाज प्रेमी न तो अपना बनाना चाहता है और न ही अपने बच्चों को बनने देता है ।
*जल में रह कर कोई मगरमच्छ से वैर* नहीं लेना चाहता है। सभी *जेहि विधि राखे सरकार तिहि विधि * रहना चाहते हैं , भले ही घुट-घुट कर जीना पड़े ।
यही कारण है कि अब देश में भगत सिंह आदि जैसा कोई देश व समाज भक्त नहीं पैदा होता ।
आजाद भारत देश में अब तक देश व समाज भक्ति के नाम पर कोई बलि वेदी पर चढ़ा तो वह है बिहार प्रान्त के आरा ,भोजपुर जनपद के शाहपुर थानांतर्गत ग्राम विलौटी में पैदा हुआ *भरत भूषण तिवारी* ।
सूत्रों के अनुसार बिहार प्रान्त अंतर्गत आरा जनपद के ग्राम जवाईनियाँ के 50 घर जुलाई 2025 में गंगा नदी में आई बाढ़ में समा गए थे,जिसकी वजह से करीब 600 गरीब निषाद,पासी आदि जाति के लोंगो को विस्थापित होना पड़ा । इन विस्थापित लोंगो को प्रशासन भरत तिवारी के गांव विलौटी में बसने के लिए जगह उपलब्ध कराया।
बिहार सरकार ऐसे विस्थापितों को मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराए जाने के लिए करोड़ो रूपये जारी किया था। जनपद प्रशासन जारी सरकारी धन का बन्दर बांट करना चाहता था ,इसलिए विस्थापितों को जरूरी सुविधाएं नहीं उपलब्ध करा रहा था।
भरत तिवारी इन्ही गरीब लोंगो की आवाज बनकर जनपद प्रशासन पर बार-बार दबाव डाल रहे थे ।इसी मुद्दे को लेकर उनका जगदीशपुर के एस0 डी0 एम 0 से काफी नोंक-झोंक हुआ था, जिस पर वहाँ का एस0 डी0 एम0 भारत तिवारी को मरवा देने की धमकी भी दिया था । सूत्रों के अनुसार इसी के चलते भरत तिवारी अपने जिन्दा रहते हुए ही अपना पिंडदान कर लिए थे। प्रशासन के लोग उन्हें अपना दुश्मन मानते हुए उनके खात्मे के लिए उन पर पुलिसिया दबाव डलवाने लगे।
सूत्रों के अनुसार उसी के बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा तथा पुलिस को धमकाने के लिए एक पिस्टल खरीद लिया था ।अपनी उस पिस्टल से भरत तिवारी ने मरते दम तक किसी को भी नहीं मारा था ।भरत तिवारी ने अपने पुलिस एन्काउंटर के दिनांक 17 जून 2026 तक घटित घटनाओं से सम्बंधित लाइव वीडियो अपने फेशबुक पेज bharat tiwari पर अपलोड किया था । अब उनके फेसबुक पेज से उनका पुलिस एन्काउंटर के पहले का अंतिम वीडियो साजिशन हटा दिया गया है।
स्थानीय पुलिस 16 जून से ही उनके एन्काउंटर के लिए उनके घर पर दविश देती रही है। 17 जून 2026 को दिन के उजाले में 50सों बंदूकधारी पुलिस वालों के सामने अकेला भरत तिवारी निडर,निर्भीक होकर यह कहते हुए कि मेरी मांग मान ली जाएगी तो लो मैं हथियार फेंक देरहा हूँ ,अगर हथियार फेंकने के बाद मेरे साथ कोई छल हुआ तो समाज और देश के लोग समझेंगे ,यह कहते हुए पुलिस वालों के सामने अपनी पिस्टल फेंक कर सरेन्डर कर दिया था ।भरत तिवारी के निहत्थे होते ही काले अंग्रेज शासकों की पुलिस ने उनका एन्काउंटर कर दिया ।
भरत तिवारी के फेशबुक पेज bharat tiwari पर जाकर देखा जा सकता है कि वह एक सच्चा देश व समाज प्रेमी था। कितने ही मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों उनका सम्मान किया है। वह एक साहसी ,निडर तथा मौत से भी न डरने वाला इंसान था।
वह अपने वीडियो में कहता है कि विधायक,सांसद को जनता से झूँठा वायदा नहीं करना चाहिए ।जो वायदा करें उसे अवश्य पूरा करना चाहिए। कहा जा सकता है कि आजाद भारत में भरत तिवारी के रूप में भगत सिंह ने ही जन्म लिया था, जिसे काले अंग्रेजों ने मार डाला।
![]() |
| (यह पुलिस एन्काउंटर के पहले के वीडियो का फोटो है जो अब डिलीट किया जा चुका है ) |












