आयुर्वेद में उपचार के साथ स्वास्थ्य संरक्षण और संतुलित जीवनशैली पर जोर — प्रो. डॉ. नवीन सिंह ।
• सुरेश कुमार सिंह गौतम
आयुर्वेद दिवस विशेष: स्वस्थ जीवन की राह दिखाती भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा ।
बस्ती(उ0प्र0)–22 सितम्बर 2026 ,भारतीय ज्ञान परंपरा में आयुर्वेद का विशेष स्थान है। यह केवल रोगों के उपचार की चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि शरीर, मन, आहार, दिनचर्या और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए स्वस्थ जीवन जीने की समग्र दृष्टि है। आयुर्वेद दिवस के अवसर पर समाज को अपनी इस समृद्ध स्वास्थ्य परंपरा के मूल सिद्धांतों को समझने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया जाना आवश्यक है।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह (योगी), राष्ट्रीय महासचिव, विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत, ने कहा कि आयुर्वेद का मूल उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग का निवारण करना है। आयुर्वेद हमें यह संदेश देता है कि स्वास्थ्य केवल बीमारी से मुक्त होने का नाम नहीं, बल्कि शरीर और मन के संतुलन से जुड़ी व्यापक अवस्था है।
आहार और दिनचर्या का स्वास्थ्य पर प्रभाव। ----------------------------------
आयुर्वेद में आहार को स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन और शारीरिक सक्रियता की कमी अनेक स्वास्थ्य चुनौतियों से जुड़ी हुई है। ऐसे में संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि को जीवन का हिस्सा बनाना उपयोगी हो सकता है।
आयुर्वेद की दिनचर्या और ऋतुचर्या की अवधारणाएं भी जीवन में नियमितता और मौसम के अनुरूप खान-पान एवं व्यवहार के महत्व को रेखांकित करती हैं। व्यक्ति की आयु, प्रकृति, कार्यक्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जीवनशैली में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
योग और प्राणायाम से मानसिक संतुलन । -----------------------------------
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि आज तनाव और अनियमित जीवनशैली बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं। योग, प्राणायाम, ध्यान और नियमित शारीरिक गतिविधियां स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन सकती हैं। इनके नियमित और उचित अभ्यास से शारीरिक सक्रियता, एकाग्रता और मानसिक संतुलन को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी बीमारी की स्थिति में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन भी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वय आवश्यक । -----------------------------------
आयुर्वेद की प्राचीन अवधारणाओं को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रमाणों के आधार पर समझना समय की आवश्यकता है। परंपरागत ज्ञान के उपयोगी सिद्धांतों को वैज्ञानिक कसौटी पर परखते हुए जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका उचित उपयोग किया जा सकता है।
आयुर्वेद दिवस का उद्देश्य केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना भी है। युवा पीढ़ी को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, योग, तनाव प्रबंधन और नशामुक्त जीवन के प्रति जागरूक करना स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। आयुर्वेद हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य, संयमित जीवन और स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में प्रेरित करता है।
आयुर्वेद के 10 स्वास्थ्य सूत्र। -------------------------------------
1. संतुलित एवं पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दें।
2. भोजन समय पर और अपनी आवश्यकता के अनुरूप करें।
3. नियमित शारीरिक गतिविधि एवं योग को दिनचर्या में शामिल करें।
4. पर्याप्त और नियमित नींद लें।
5. मौसम के अनुरूप खान-पान और जीवनशैली में बदलाव करें।
6. तनाव कम करने के लिए ध्यान एवं प्राणायाम का अभ्यास करें।
7. स्वच्छता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
8. नशे और तंबाकू जैसे स्वास्थ्य-हानिकारक पदार्थों से दूर रहें।
9. किसी बीमारी में स्वयं औषधि लेने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लें।
10. प्रकृति, पर्यावरण और अपने शरीर के प्रति संवेदनशील रहें।